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जल तुल्यांक क्या है? न्यूटन का शीतलन नियम क्या है? ताप प्रवणता क्या है? कृष्णिका क्या है? परिवर्ती दशा क्या है? स्थायी दशा क्या है? चालन, संवहन और विकिरण क्या है?

जल तुल्यांक क्या है? न्यूटन का शीतलन नियम क्या है? ताप प्रवणता क्या है? कृष्णिका क्या है? परिवर्ती दशा क्या है? स्थायी दशा क्या है? चालन, संवहन और विकिरण क्या है?

जल तुल्यांक क्या है? 

"किसी वस्तु का जल तुल्यांक जल की वह मात्रा है जिसके ताप को 1°c बढ़ाने के लिए उतनी ही ऊष्मा  की आवश्यकता होती है जितनी की वस्तु के ताप को 1°c बढ़ाने के लिए आवश्यक है। "


न्यूटन का शीतलन नियम क्या है? 

" यदि किसी वस्तु के ताप व उसके चारों ओर के वातावरण के ताप में अधिक अंतर ना हो तो वस्तु के शीतलन की दर वस्तु के मध्यमान ताप और वातावरण के ताप के अंतर के अनुक्रमानुपाती होती है। "
                         यही न्यूटन का शीतलन नियम है। 


ताप प्रवणता क्या है? 

" दूरी के सापेक्ष ताप परिवर्तन की दर को ताप प्रवणता कहते हैं।" 


कृष्णिका क्या है? 

"वह पदार्थ जो उस पर आपतित समस्त ऊष्मा विकिरण का अवशोषण कर लेते है तथा जब उन्हें उपयुक्त ताप पर गर्म करने पर सभी तरंग दैर्ध्य के विकिरण उत्सर्जित करते हैं कृष्णिका कहलाते हैं।" 


परिवर्ती दशा क्या है? 

"जब सुचालक छड़ के एक सिरे को गर्म किया जाता है तो प्रत्येक भाग का ताप धीरे-धीरे बढ़ने लगता है इस दशा को परिवर्ती दशा कहते हैं।" 


स्थायी दशा क्या है? 

 "जब सुचालक छड़ के एक सिरे को गर्म किया जाता है तो उसके प्रत्येक भाग का ताप धीरे-धीरे बढ़ने लगता है तथा एक स्थिति ऐसी आती है जब ताप का बढ़ना बंद हो जाता है। यद्यपि भिन्न-भिन्न भागों का ताप भिन्न-भिन्न होता है। इस दशा को स्थायी दशा कहते हैं। "



चालन क्या है? 

" वह विधि जिसमें ऊष्मा गर्म सिरे से ठंडे सिरे की ओर प्रवाहित होती है माध्यम के कण अपनी माध्य स्थिति के दोनों और गति करते हैं किंतु आगे बिल्कुल नहीं बढ़ते हैं। चालन कहलाती है। "


संवहन क्या है? 

"वह विधि जिसमें माध्यम का प्रत्येक कण ऊष्मा के स्त्रोत से ऊष्मा लेता है तथा गतिशील होता है संवहन कहलाती है।" 


विकिरण क्या है? 

" वह विधि जिसमें ऊष्मा सरल रेखा में चलकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचती है विकिरण कहलाती है।"


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एक सेकंड में चालक के अनुप्रस्थ परिछेद
से गुजरने वाले इलेक्ट्रॉनो की संख्या =

t सेकंड में चालक के अनुप्रस्थ परिछेद
से गुजरने वाले इलेक्ट्रॉनो की संख्या =


यदि प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर आवेश की मात्रा e हो तो t समय में प्रवाहित कुल आवेश

अतः विद्युत धारा

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                                R ∝ l/A

                               R=p l /A


( जहां p एक नितांक है इसे चालक का विशिष्ट प्रतिरोध कहते हैं ) 


p =  RA / I


विशिष्ट प्रतिरोध का मात्रक। विशिष्ट प्रतिरोध का SI पद्धति में मात्रक 
यह एक अदिश राशि हैं तथा SI पद्धति में मात्रक ohm × m   (ओम ×मीटर )  होता हैं ।
                        यदि A=1   ओर   l=1 हो तो

p=R

इस प्रकार किसी एकांक लंबाई ओर एकांक अनुप्रस्थ परिक्षेद के क्षेत्रफल के चालक के प्रतिरोध को ही विशिष्ट प्रतिरोध कहते हैं। 


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