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ठोस क्या है? ठोस कितने प्रकार के होते हैं? क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय ठोस क्या है? क्रिस्टलीय ओर अक्रिस्टलीय ठोस में अंतर। विशेष वर्णन


thos kya he? thos ke prakar । kristaliy thos or akristaliy thos।
ठोस क्या है? ठोस के प्रकार । 

ठोस क्या है? 

ठोस - : "ऐसे पदार्थ जिनका आकार और आयतन निश्चित होता है ठोस कहलाते हैं। "

             ठोसों के अवयवी कण (परमाणु अणु और आयन)  गति करने के लिए स्वतंत्र नहीं होते, किंतु अवयवी कणों के मध्य लगने वाले प्रबल आकर्षण बल के कारण वे अपने निश्चित स्थान पर दोलन (केवल कंपन) कर सकते हैं। इस तरह ठोसो के मुख्य अभिलक्षण असंपीड्यता, द्रणता एवं उच्च यांत्रिकीय सामर्थ्य। यह दर्शाते हैं कि ठोसो को बनाने वाले अवयवी कण परमाणु,  अणु और आयन आपस में घनिष्ठ संकुलित होते हैं।


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ठोस के प्रकार लिखें।  ठोस के प्रकार - :

ठोस दो प्रकार के होते हैं - :

(1) क्रिस्टलीय ठोस 

(2) अक्रिस्टलीय ठोस  

क्रिस्टलीय ठोस क्या है? 

क्रिस्टलीय ठोस - : इन ठोसो में अवयवी कणों (परमाणु, अणु और आयन)  की एक निश्चित नियमित ज्यामितीय व्यवस्था होती है, जिसकी बार-बार पुनरावृत्ति होने पर एक निश्चित ज्यामिति वाली त्रिविमीय संरचना का निर्माण होता है। हम कह सकते हैं कि क्रिस्टलीय ठोसो में दीर्घ परास क्रम होता है।  इस तरह क्रिस्टलीय ठोस में बड़ी संख्या में इन्हें बनाने वाली इकाई होती है जिन्हें क्रिस्टल कहा जाता है। अतः क्रिस्टल वे ठोस पदार्थ होते हैं जिनकी निश्चित ज्यामिति आकृति समतल फलक एवं तीक्ष्ण किनारे होती है। क्रिस्टलीय ठोस वास्तविक ठोस के रूप में जाने जाते हैं। 
                           क्रिस्टलीय ठोस के कुछ उदाहरण -  सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक)  सुक्रोज (शक्कर) हीरा क्वार्ट्ज ठोस धातुएं आदि।

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अक्रिस्टलीय ठोस क्या है? 

अक्रिस्टलीय ठोस - : अक्रिस्टलीय ठोस जिन्हें Amorphous कहा जाता है यह शब्द ग्रीक शब्द 'Omorphe'  से व्युत्पन्न  किया गया है जिसका अर्थ होता है आकारविहीन जो इंगित करता है कि अक्रिस्टलीय ठोस में अवयवी कणों की व्यवस्था नियमित नहीं होती है। यद्यपि कुछ पदार्थों में अवयवी कणों की व्यवस्था में लघु परासक्रम होता है जिसमें यह क्रिस्टलीय ठोस की तरह व्यवहार करते हैं। ऐसे क्षेत्र क्रिस्टलेट्स कहलाते हैं  इस तरह अक्रिस्टलीय ठोसो में अवयवी कणों की व्यवस्था में लघु पराक्रम होता है। 

लघु पराक्रम दीर्घ पराक्रम चित्रों में देख सकते हैं।
Thos kya he? thos ke prakar। kristaliy thos or akristaliy thos
क्वार्ट्ज मे दीर्घ परास क्रम                    क्वार्ट्ज मे लघु परास क्रम


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                                R ∝ l/A

                               R=p l /A


( जहां p एक नितांक है इसे चालक का विशिष्ट प्रतिरोध कहते हैं ) 


p =  RA / I


विशिष्ट प्रतिरोध का मात्रक। विशिष्ट प्रतिरोध का SI पद्धति में मात्रक 
यह एक अदिश राशि हैं तथा SI पद्धति में मात्रक ohm × m   (ओम ×मीटर )  होता हैं ।
                        यदि A=1   ओर   l=1 हो तो

p=R

इस प्रकार किसी एकांक लंबाई ओर एकांक अनुप्रस्थ परिक्षेद के क्षेत्रफल के चालक के प्रतिरोध को ही विशिष्ट प्रतिरोध कहते हैं। 


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