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ओम का नियम क्या है? ओर इसकी शर्ते तथा नियम का सत्यापन। विस्तृत जानकारी

ओम का नियम क्या है?ओम का नियम किसे कहते हैं? 

"जब किसी चालक की भौतिक अवस्था (लंबाई, ताप) मैं कोई परिवर्तन नहीं हो रहा हो तो चालक में प्रवाहित धारा उसके सिरो के बीच आरोपित विभवान्तर के अनुक्रमानूपाती होती है ।" यही ओम का नियम है।
                             यदि चालक के सिरो के बीच आरोपित विभवान्तर v ओर उसमें प्रवाहित धारा I हो तो
                              v ∝ I
              
                               v= RI     

(जहां R एक नितांक है, इसे चालक का प्रतिरोध कहते हैं।) 

                                    
                              R=v/I
                 प्रतिरोध = विभवान्तर / धारा

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ओम के नियम की शर्तें - :



  1. चालक का ताप नियत रहना चाहिए। 
2. चालक मे कोई विकृति नहीं होना चाहिए।

ओम के नियम का सत्यापन - :

कोई चालक ओम के नियम का पालन कर रहा है या नहीं इस बात का पता लगाने के लिए चालक के सिरे के बीच भिन्न - भिन्न मानो के विभवान्तर लगाकर उसमें प्रवाहित धारा को नोट करते है। तथा विभवान्तर ओर धारा के मध्य ग्राफ खींचते है। यह ग्राफ सरल रेखा प्राप्त होता है। तो चालक ओम के नियम का पालन करता है।

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टिप्पणियाँ

  1. Site bahut acchi hai aapki but aap apne post me custom permalinks use kijiye...jo aapne uper link diya hai usme blog-post.html URL hai aapko waha par custom URL yani ki Post se related Keyword add karna hai....thanks adhik jankari ke liye hamari SEO se related post padh skte hai

    उत्तर देंहटाएं
  2. nice bro but look thoda badlo aur google adsense ka approval lo uske liye aapko about us aur contect us privacy policy disclimer ka pese banao google addsense ka aproval jarur milega

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही अच्छी पोस्ट है मुकेश जी, काफी अच्छा समझाया है आपने।

    उत्तर देंहटाएं

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                                R ∝ l/A

                               R=p l /A


( जहां p एक नितांक है इसे चालक का विशिष्ट प्रतिरोध कहते हैं ) 


p =  RA / I


विशिष्ट प्रतिरोध का मात्रक। विशिष्ट प्रतिरोध का SI पद्धति में मात्रक 
यह एक अदिश राशि हैं तथा SI पद्धति में मात्रक ohm × m   (ओम ×मीटर )  होता हैं ।
                        यदि A=1   ओर   l=1 हो तो

p=R

इस प्रकार किसी एकांक लंबाई ओर एकांक अनुप्रस्थ परिक्षेद के क्षेत्रफल के चालक के प्रतिरोध को ही विशिष्ट प्रतिरोध कहते हैं। 


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t सेकंड में चालक के अनुप्रस्थ परिछेद
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अतः विद्युत धारा

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