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विद्युत धारा क्या है? विद्युत धारा का SI मात्रक। पूर्ण ज्ञान

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 पिछले आर्टिकल में हमने प्रतिरोध ओर  विशिष्ट प्रतिरोध के बारे में जाना था।  आज हम विद्युत धारा के बारे में जानेंगे। 
विद्युत धारा - : "किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ परिच्छेद में आवेश प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं।"

यदि किसी चालक में t समय में Q आवेश प्रवाहित होता है, तो विद्युत धारा
                       I = Q / t

विद्युत धारा एक अदिश राशि है। फिर भी इसे किसी परिपथ में तीर युक्त रेखाओं से प्रदर्शित किया जाता है। SI पद्धति में विद्युत धारा का मात्रक एंपियर है।
इसका अन्य मात्रक कुलाम प्रति सेकंड भी है।



             1 एम्पियर =1000 मिली एम्पियर

        1 मिली एम्पियर = 1000 माइक्रो एम्पियर

             1 एम्पियर = 1 कुलाम / 1 सेकंड

यदि किसी चालक में 1 सेकंड में 1 कूलाम आवेश प्रवाहित होता है तो, उस म…
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आवेशित संधारित्र की ऊर्जा क्या है? संधारित्र में संचित ऊर्जा क्या है? आवेश का पृष्ठ घनत्व क्या है? संवहन विसर्जन क्या है? वैद्युत पवन क्या है? वान-डी ग्राफ जनित्र क्या है? वान-डी ग्राफ जनित्र का सिद्धांत, उपयोग और दोष लिखो। विद्युत क्षेत्र का ऊर्जा घनत्व क्या है?

आवेशित संधारित्र की ऊर्जा क्या है?  संधारित्र को आवेशित करने में किया गया कार्य उसकी स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। यह कार्य अपनाए गए तरीके पर निर्भर नहीं करता है इसका मान केवल प्रारंभिक एवं अंतिम स्थितियों में कार्य के अर्थात  स्थितिज ऊर्जा के अंतर पर निर्भर करता है। 

संधारित्र में संचित ऊर्जा क्या है?  प्रत्येक चालक को आवेशित करने में कुछ कार्य करना पड़ता है। यह कार्य चालक में विद्युत स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित रहता है। 

आवेश का पृष्ठ घनत्व क्या है?  हम जानते हैं कि किसी चालक को आदेश दिया जाता है तो संपूर्ण आवेश उसके बाह्य पृष्ठ पर ही रहता है।                                                            "किसी चालक के एकांक क्षेत्रफल पर आवेश की मात्रा को आवेश का पृष्ठ घनत्व कहते हैं।" 

संवहन विसर्जन क्या है? "वायु के कणों द्वारा आवेश के बाहर जाने की क्रिया को संवहन विसर्जन कहते हैं। "

किसी वायु के कण के द्वारा आवेश का बाहर जाना संवहन विसर्जन कहलाता है। 

वैद्युत पवन  क्या है?  हम जानते हैं कि वायु के कणों द्वारा आवेश के बाहर जाने की क्रिया को संवहन विसर्जन

संधारित्र क्या है? संधारित्र के प्रकार, सिद्धांत ओर उपयोग। संधारित्र की धारिता को प्रभावित करने वाले कारक।

संधारित्र क्या है? संधारित्र का सिद्धांत क्या है? 
"किसी आवेशित चालक के समीप पृथ्वी से संबंधित अन्य चालक को लाने पर आवेशित चालक की विद्युत धारिता बढ़ जाती है। दो चालकों के इस समायोजन को ही संधारित्र कहते हैं। " यही संधारित्र का सिद्धांत है।

इसे हम इस प्रकार से भी कह सकते है।
                                               संधारित्र वह युक्ति है जिसके द्वारा किसी चालक के आकार या आयतन में बिना परिवर्तन किए उसकी विद्युत धारिता बढ़ाई जा सकती है।


अर्थात चालक की विद्युत धारिता संधारित्र के द्वारा बिना आकार ओर आयतन में परिवर्तन किये बड़ाई जा सकती है।

संधारित्र में धातु की दो प्लेटें लगी होती है। जिसके बीच के स्थान में कोई कुचालक डाईइलेक्ट्रिक पदार्थ भरा जाता है। संधारित्र की प्लेटों के बीच तभी धारा का प्रवाह होता है जब इसके दोनों प्लेटों के बीच का विभवांतर समय के साथ बदले। यही कारण है कि जब नियत डीसी विभवांतर लगाया जाता है तो स्थाई अवस्था में संधारित्र में कोई धारा नहीं बहती है।

संधारित्र की धारिता को प्रभावित करने वाले कारक। किसी संधारित्र की धारिता निम्न कारकों पर निर्भर करती है -

(…

आवेश केंद्र क्या है? विद्युत धारिता क्या है? धारिता का मात्रक। परावैद्युत का ध्रुवण क्या है? परावैद्युत के ध्रुवण के प्रकार। ध्रुवीय और अध्रुवीय परावैद्युत के ध्रुवण क्या है? परावैद्युत सामर्थ्य क्या है?

आवेश केंद्र क्या है? "एक ऐसा बिंदु जहां पर समस्त आवेश को केंद्रित माना जा सकता है, आवेश केंद्र कहलाता है। "


अर्थात ऎसा बिन्दु जिस पर संपूर्ण आवेश केंद्रित माना जाता है। आवेश केंद्र कहलाता है।

विद्युत धारिता क्या है? यदि किसी चालक को Q आवेश देने से उसके विभव में V की वृद्धि हो, तो 
Q ∝ V या Q = C. V 
जहां C एक नियतांक है जो चालक की आकृति, क्षेत्रफल और उसके चारों और के माध्यम पर निर्भर करता है। इसे चालक की विद्युत धारिता कहते हैं। 
विद्युत धारिता C = Q / V 



धारिता का मात्रक। धारिता का s.i मात्रक। धारिता का s.i मात्रक फेरड है। ( संकेत F ) 



परावैद्युत का ध्रुवण क्या है?  "परावैद्युत पदार्थ विद्युत उदासीन होते हैं। जब इन्हें विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है तो परावैद्युत पदार्थ के एक पृष्ठ पर ऋणावेश तथा दूसरे सम्मुख पृष्ठ पर धनावेश उत्पन्न हो जाते हैं। इस घटना को परावैद्युत का ध्रुवण कहते हैं। "


परावैद्युत के ध्रुवण के प्रकार।  परावैद्युत के ध्रुवण दो प्रकार के होते हैं।
(1) ध्रुवीय परावैद्युत का ध्रुवण। 
(2) अध्रुवीय परावैद्युत का ध्रुवण। 
ध्रुवीय परावैद्युत का ध्रुवण क्या है?  …

विद्युत विभव का अध्यारोपण सिद्धांत क्या है? विभव को प्रभावित करने वाले कारक। विभव प्रवणता क्या है? समविभव पृष्ठ क्या है? इसके के उदाहरण व गुण। विद्युत ओर विद्युत परिरक्षण क्या है?

विद्युत विभव का अध्यारोपण सिद्धांत क्या है?  "आवेश निकाय के कारण किसी बिंदु पर विभव अलग-अलग आवेशों के कारण उस बिंदु पर उत्पन्न विभव के बीजगणितीय योग के तुल्य होता है। "
                              इस सिद्धांत को विद्युत विभव का अध्यारोपण सिद्धांत कहते हैं।

विभव को प्रभावित करने वाले कारक।   (1) आवेश की मात्रा।  (2) चालक का क्षेत्रफल । (3) आवेशित चालक के समीप अन्य चालक की उपस्थिति।  (4) चालक के परित: माध्यम। 

विभव प्रवणता क्या है?  "विद्युत क्षेत्र में दूरी के साथ विभव परिवर्तन की दर को विभव प्रवणता कहते हैं। "

अर्थात् विद्युत क्षेत्र में जब दूरी ओर विभव में परिवर्तन होगा तब उन दोनों के परिवर्तन की दर को विभव प्रवणता कहते हैं। 
समविभव पृष्ठ क्या है? "वह पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर विभव समान होता है , समविभव पृष्ठ कहलाता है। "
समविभव पृष्ठ के एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक एकांक धनावेश को ले जाने में किया गया कार्य शुन्य होता है। 
समविभव पृष्ठ के उदाहरण।  (1) एकसमान क्षेत्र में समविभव समतल पृष्ठ। 
(2) सजातीय आवेश के समविभव पृष्ठ।
(3) वैद्युत द्विध्रुव के समविभव …

विभव क्या है? विभव का मात्रक ओर प्रकार। धनात्मक, ऋणात्मक विभव क्या है? विभवांतर क्या है? पृथ्वी का विभव कितना होता है।

विभव क्या है?  "एकांक धनावेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में जितना कार्य करना पड़ता है, उसे उस बिंदु का विभव कहते हैं।" विभव एक अदिश राशि है। 

विभव का मात्रक।  s.i पद्धति में विभव का मात्रक वोल्ट है। 

विभव के प्रकार।  विभव मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं -  (1) धनात्मक विभव। (2) ऋणात्मक विभव। 
धनात्मक विभव क्या है?  "एकांक धनावेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में विद्युत बल के विरुद्ध जो कार्य करना पड़ता है धनात्मक विभव कहलाता है। "



ऋणात्मक विभव क्या है?  "एकांक धनावेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में विद्युत बल द्वारा जो कार्य किया जाता है, उसे बिंदु का ऋणात्मक विभव कहते है। "


विभवांतर क्या है? "विद्युत क्षेत्र में एकांक धनावेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में जितना कार्य करना पड़ता है उसे उन दोनों बिंदुओं के बीच का विभवांतर कहते हैं।" 


पृथ्वी का विभव कितना होता है। पृथ्वी का विभव शुन्य होता है।

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जल तुल्यांक क्या है? न्यूटन का शीतलन नियम क्या है? ताप प्रवणता क्या है? कृष्णिका क्या है? परिवर्ती दशा क्या है? स्थायी दशा क्या है? चालन, संवहन और विकिरण क्या है?

जल तुल्यांक क्या है?  "किसी वस्तु का जल तुल्यांक जल की वह मात्रा है जिसके ताप को 1°c बढ़ाने के लिए उतनी ही ऊष्मा  की आवश्यकता होती है जितनी की वस्तु के ताप को 1°c बढ़ाने के लिए आवश्यक है। "

न्यूटन का शीतलन नियम क्या है?  " यदि किसी वस्तु के ताप व उसके चारों ओर के वातावरण के ताप में अधिक अंतर ना हो तो वस्तु के शीतलन की दर वस्तु के मध्यमान ताप और वातावरण के ताप के अंतर के अनुक्रमानुपाती होती है। "                          यही न्यूटन का शीतलन नियम है। 

ताप प्रवणता क्या है?  " दूरी के सापेक्ष ताप परिवर्तन की दर को ताप प्रवणता कहते हैं।" 

कृष्णिका क्या है?  "वह पदार्थ जो उस पर आपतित समस्त ऊष्मा विकिरण का अवशोषण कर लेते है तथा जब उन्हें उपयुक्त ताप पर गर्म करने पर सभी तरंग दैर्ध्य के विकिरण उत्सर्जित करते हैं कृष्णिका कहलाते हैं।" 

परिवर्ती दशा क्या है?  "जब सुचालक छड़ के एक सिरे को गर्म किया जाता है तो प्रत्येक भाग का ताप धीरे-धीरे बढ़ने लगता है इस दशा को परिवर्ती दशा कहते हैं।" 

स्थायी दशा क्या है?   "जब सुचालक छड़ के एक सिरे को गर्म किया …

विशिष्ट ऊष्मा क्या है? इसका का s.i मात्रक। ऊष्मा धारिता क्या है? इसका s.i मात्रक। गुप्त ऊष्मा क्या है? ऊष्मीय प्रतिरोध क्या है? ऊष्मीय विसरणशीलता क्या है?

विशिष्ट ऊष्मा क्या है? "किसी वस्तु के एकांक द्रव्यमान के ताप को 1°c या 1k  बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उस वस्तु के पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा कहते हैं। "
विशिष्ट ऊष्मा का s.i मात्रक। 


आण्विक विशिष्ट ऊष्मा या मोलर विशिष्ट ऊष्मा क्या है? " किसी वस्तु के एक मोल के ताप को 1°c या 1k बढाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उस वस्तु के पदार्थ आण्विक विशिष्ट ऊष्मा या मोलर विशिष्ट ऊष्मा कहते हैं। "


ऊष्मा धारिता क्या है?  " किसी वस्तु के ताप को 1°c बढाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उस वस्तु की ऊष्मा धारिता कहते हैं। "

ऊष्मा धारिता का s.i मात्रक।  ऊष्मा धारिता का s.i मात्रक जूल / केल्विन है। 
गुप्त ऊष्मा क्या है?  " नियत ताप पर किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान की अवस्था में परिवर्तन करने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उस पदार्थ की गुप्त ऊष्मा कहते हैं। "

ऊष्मीय प्रतिरोध क्या है?  "किसी छड़ के सिरे के बीच तापांतर और उसमें उष्मा प्रवाह की दर के अनुपात को उस छड़ का ऊष्मीय प्रतिरोध कहते हैं।" 

ऊष्मीय विसरणशीलता क्या है?  "पदार्थ की ऊष्मा चा…